*अपनों के काम आये जैन समाज*
*खेतवाड़ी में जैन जागरण शिविर में विदुषी साध्वी मयणाश्रीजी ने कहाँ*
🔺समाज में एकता बनाये रखें
एक मजबूर माँ द्वारा की ममता का उल्लेख जो अपने बच्चों के पेट पालने के लिये ग़लत मार्ग पर चल पड़ती है। इस तरह की परिस्थिति किसी के सामने न आने पाये, इसके लिये प्रयास करने होंगे।
🔺साधर्मिक सहयोग की भावना जागृत करें।किसी का सहयोग करें, तो उसको गुप्त रखें।
🔺अन्नशालायें विकसित करें, ताकि कोई भी भाई भूखा न सोने पाये।सिख धर्म के लोग धन्यवाद के पात्र है, कि उनके लंगर में ज़रूरतमंद लोंगो की भूख मिटती है।
🔺उन्होंने तमाम जैन परिवारों के बारे में बताया कि मुंबई में ही तमाम जैन परिवार बड़ी दयनीय हालत है, उनके बारे में सोचो
मंदिर मत बनाओचातुर्मास मत कराओ संघ मत निकालो
बड़े बड़े चढ़ावे मत लो
अगर कुछ करना चाहते हो तो अपने आस पास के लोगो के आँसू पोंछने का प्रयास करे।
🔺किसी को ख़ाली पेट मत सोने दो एक भी जैन को किसी के सामने हांथ न फैलाना पड़े। जब हर क़ौम अपने समाज को आगे बढ़ा रहा है तो जैन पीछे क्यों है। आज संकल्प लेने की ज़रूरत है कि हम अपने समाज के काम आये। संकल्प भी दिलाया।
🔺कुछ जैन परिवारों की दयनीय दशा पर कहा कि दवा के लिये पैसे नही हैं। बच्चे पढ़ नही पा रहे हैं। एक एक पैसों के लिये आपके भाई बहन दर दर भटक रहे हैं, उनकी मदद के लिये सभी को आगे आने की ज़रूरत है।
🔺यात्रा संघों के बदलते स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ निकालने का मकसद होता था कि रास्ते में आने वाले ज़रूरतमंद जैन परिवारों की सहायता की जा सकें।
अगर जैन एक दूसरे का सहयोग नही किया गया तो भविष्य में समाज के घोर संकट का सामना करना पड़ेगा। वर्ना दूसरे धर्म में पलायन होगा। कई उदाहरण भी दिये जहाँ जैन परिवार अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिये दूसरे धर्म में जा रहे हैं।
🔺२५ फ़ीसदी व्यापार समाजबंधुओ के साथ करो और १० फ़ीसदी कर्मचारी जैन ही रखो, जिससे जैन समाज आर्थिक रूप से समृद्ध हो सके।
इस शिविर में करीबन 4000 लोगो ने भाग लिया।
🔺ये जानकारी भरत एन.कोठारी
(कोसेलाव)द्वारा दी गयी।

Post a Comment