*भक्ति के नये रंग नयी तरंग नये आगाज के साथ सूरों के बिखरे रंग धारवाड़ की पुण्यनगरी में......*
*♦धारवाड़ की धन्यधरा पर पर प.पु.गुरुदेव आ.श्री महेन्द्रसागरसुरीश्वरजी म.सा. के आर्शीवाद से शा केवल
चंदजी सुखराजजी ललवाणी एवं मातुश्री लीलाबाई केवलचंदजी ललवाणी के जीवन मे किए सुकृत के अनुमोदनार्थ एवं साथ ही ललवाणी परिवार में हुई सिद्धि तप व मासक्षमण की तपश्चर्या के वैयावच्च निमित त्रिदिवसीय जिवित महोत्सव,एवं भव्य जिनभक्ति के कार्यक्रम सह हर्षोल्लास के साथ संपन्न*
♦श्रीमती लीलाबाई केवलचंदजी ललवानी के जीवितमहोत्सव ओर उनके परिवार में किये तीन माक्षखमण और दो सिद्धितप तपस्या निमित्त भव्य महोत्सव के तहत दो तीन दिन भव्य भक्ति व एक दिन भव्यातिभव्य मातृ-पितृ वंदनावली का आयोजन किया गया जिसमे भक्ति का रंग जमाया सूरो के जादूगर संगीत सम्राट विपिनजी पोरवाल एवं सुप्रसिद्ध ओजस्वी युवा मंचसंचालक भरतजी कोठारी ने
♦जिन भक्ति और जीवित महोत्सव उत्सव तो बहुत होते हैं ।लेकिन किसी भी उत्सव महोत्सव मैं भक्ति में चार चाँद तब लगते है जब दिल से शब्दों और भावों के साथ मिलकर संगीत की मिठी तान जब भक्त और भगवान को रिझाए और आत्मा का परमात्मा के साथ मिलन हो ।तब जाकर उत्सव सफल होता है ।
♦ठीक वैसा ही नजारा ललवाणी परिवार द्वारा आयोजित जीवित महोत्सव मे देखने को मिला ।
♦ललवाणी परिवार ने तो उत्सव आयोजित करके पुण्य का कार्य किया। उनके परिवार की में खुब -खुब अनुमोदना करता हूँ ।
♦साथ ही साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर पूरे त्रिदिवसिय कार्यक्रम को चार चाँद लगाकर भक्तों को अपने शब्दों से सम्मोहित कर भक्ति में चार चाँद लगाकर सोने पे सुहागा का काम किया भरतजी कोठारी और विपिनजी पोरवाल ने
♦जिन भक्ति और माता-पिता वंदनावली में भरतजी का शब्दों के सटीक संयोजन के साथ सधा हुआ मंच संचालन एवं विपिनजी की नेह नितरती जादुई आवाज सीधा भगवान के साथ कनेक्ट करती है और उन्हें समाधि भाव की और ले जाता है।
♦विपिनजी पोरवालऔर भरतजी कोठारी की ये युगल जोडी आने वाले समय में जिन शासन मे भक्ति संगीत की दुनिया मे डंका बजाते हुए नये आगाज, अंजाम और आयाम बनाएगे ।
ऐसा सबका मानना है।
♦विपिनजी द्वारा गाए भक्ति गीत और दिल छू लेने वाले माँ-बेटी के गीत सबके मन को मोह लिया ।
♦धारवाड में सभी का मानना था कि ऐसी जिन भक्ति ना पहले देखी ना सुनी ।इतनी जोरदार भक्ति धारवाड में पहली बार हुई ।
जिनमे भक्त करीबन लास्ट तक नही उठे।ऐसी भक्ति को वर्षो तक याद रखा जायेगा
♦उपरोक्त महोत्सव के तहत तीन दिन भव्य भक्ति व एक दिन भव्यातिभव्य मातृ-पितृ वंदनावली का आयोजन किया गया जिसमे भक्ति का रंग जमाया सूरो के जादूगर संगीत सम्राट विपिनजी पोरवाल एवं सुप्रसिद्ध मंच संचालक भरतजी कोठारी ने
मात-पिता वंदनावली में जिस तरह से विपिनजी पोरवाल ने गीत गाये।वहाँ पर बैठे सभी भक्तों की आंखे भर आयी।
♦अद्भुत अदभूत अविस्मरणीय भक्ति का जोरदार कार्यक्रम जो वर्षों वर्ष धारवाड के भक्त याद रखेंगे इतना जोरदार धमाकेदार कार्यक्रम रहा।
♦प्रथम दिन 4.9.17सोमवार को सुबह पूजन व रात्रि मे तपस्वियो के अनुमोदनार्थ जिन भक्ति की धूम संगीतकार सुबोधजी परमार एवं भरतजी कोठारी ने भव्य भक्ति का कार्यक्रम पेश किया।
♦दूसरे दिन दि.5.9.17 को 108 श्री पार्श्व-पूजन एवं रात को प्रभु भक्ति स्वर सम्राट सूरों के जादूगर विपिनजी एवं अपनी वाक् छटा से सबको बाँध कर रखने में माहिर भरतजी कोठारी ने क्या रंग जमाया देखते ही बनता था।
♦तीसरे दिन सुबह माता-पिता वंदनावली और पार्श्वनाथ पूजन और रात को भक्ति भावना का बरसो बरस याद रहे ऐसा महाभक्ति कार्यक्रम संगीत की सूरावलियों के साथ संपन्न हुआ।
कुल मिलाकर ललवानी परिवार द्वारा धारवाड में नया इतिहास बना जो आने वाले वर्षों तक याद रखा जायेगा।
* सुरेश ललवानी*
Post a Comment